Hindi Poems…..!!

कोरोना वायरस कविता

गुजर  रहा  है  ज़माने  का आरजू ,
थम  गई  है  सासे,
नब्स  तटोल कर  चलता  है … धर्डकनो को ..
                                              —आहिस्ते  आहिस्ते!

नब्स  तटोल कर  चलता  है … धर्डकनो को ..
ज़रा  रुक  जाओं  ए  ज़िन्दगी,
रेत की  तरह  फिछलने से पहले ….
                                             —आहिस्ते  आहिस्ते!


शर्द  हवाये हो, या  गर्म  सासे,
बहकती निगाहे, या  महकती फिजाये,
फुल  मूर्झा रही है  चमन  मे …
                                               —आहिस्ते  आहिस्ते!

ना  जाने  कौन सा  खौफ़  है ,
ना  जाने  कौन सा  डर, … जो …
जकडे हुवे  है  खुद  के  दामन मे,
ज़िंदगी की  नन्ही सासो  को …
                                            —आहिस्ते  आहिस्ते!


अजीब  बिमारी  है , फैली इन  फीजाओं  मे ,
जो निगल  रही  है , ज़िन्दगी को .., खुद  के अंदर ,..
                                         —आहिस्ते  आहिस्ते!

लोग मुस्कुरा रहे  है , ….
लोग मुस्कुरा रहे  है , 
तब-तलक ..जब-तलक उनको  एहसास नहीं  है ..
उसके  होने  का  खुद  के अंदर ,
मगर  अफसोच कि  बेडिया,..
उन्हे भी  जकड रही  है …
                                    —आहिस्ते  आहिस्ते!

बढ रही  है  कदमो  से  कदम ..
मौंत  की  चादर  ओंढे  हुवे,
पकर्ड  “कालकी ऊँगलियो  को .
                                 —आहिस्ते  आहिस्ते!

फिर  भी  ऊमीद है लोगो  को,
फिर  भी  ऊमीद है लोगो  को,
बचजायेगा  जीवन ….,
गुजर  ज़ाएगा वक़्त .. जो  है  बुरा
….
बस ..,शर्त  इतनी  सी  है  –

शब्र  करता  जा , इंसानियत  जगाता जा,
झूठी  मजहब के  बदले .. सचे  दिल  के  दरबार  से ,
दुवाए  करता  जाजो मिले  उसकी  मदद  करता जा …”

यकीन रख
गुजर  ज़ायेगा   भी  बुरे  वक़्त  का  आलम ..
                                    —
आहिस्ते  आहिस्ते!

खुदा  करे ! …खुदा  करे !…
लोगो  का  यकीन  सच  हो जाये ,
खुदा  करे , लोगो  का  यकीन  सच  हो जाये ,
नम  आखों  से .. गिरते  बुन्दो  की
दुआ कुबुल हो जाऐ ,
रोते  चेहरे मे , ..
मुस्कुरहट
फिर  से  बहाल  हो जाऐ,
                               
आहिस्ते  आहिस्ते!

By:– गुरु मस्ताना (मनीष कुमार झा)

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